यह तो भोजन के नाम पर स्वास्थ्य के साथ खेल है........? तीन महीनों में FDA का 'धडाका'.......!
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१२ हजार जांच......; ६७ करोड़ का माल जब्त......!
५,२६९ सुधार नोटिस, ६०३ लाइसेंस निलंबित.....; और ८७५ लोगों को गिरफ्तार....
अन्न सुरक्षा के नाम पर अब "कागदोपत्री निरीक्षण" नहीं, बल्कि सीधे नियामक कार्रवाई का इशारा......
मुंबई, दिनांक ११ (अनंत नलावडे) – मुंबई सहित राज्य के नागरिकों के भोजन की सुरक्षा कितनी है, इसका डरावना प्रतिबिंब अन्न व औषध प्रशासन (FDA) की तीन महीने की कार्रवाई से शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर सामने आया है।
जून से अगस्त २०२६ के दौरान राज्यभर लगभग १२ हजार ८३ निरीक्षणे की गईं। इससे ५,२६९ सुधारणा नोटिसा, ६०३ लाइसेंस निलंबित किए गए, और लगभग ६७.२० कोटी रुपये का खाद्य भंडार जप्त किया गया। इस कार्रवाई में ८७५ व्यक्तियों को गिरफ्तार करने की सूचना भी प्रशासन ने दी है।
इसमें मुख्यतः होटल, रेस्तरां, ढाबे और इसी तरह के प्रतिष्ठानों पर भी प्रशासन ने विशेष ध्यान केंद्रित किया। इस क्षेत्र में १,८०३ निरीक्षणों में ९४८ सुधारणा नोटिसा और १९९ लाइसेंस निलंबित किए गए। अर्थात्, निरीक्षण के प्रत्येक चरण पर नियमभंग के पाए जाने का चित्र इस आँकड़े से स्पष्ट होता है।
अब सटीक रूप से भोजन में खतरा कहाँ है.......?
FDA के निरीक्षण में साफ पानी और उचित निस्सारण न होना, शीत श्रृंखला का उल्लंघन, रेफ्रिजरेटर में आवश्यक तापमान न बनाए रखना, पिस्सू का प्रकोप, भोजन संभालने वाले कर्मचारियों द्वारा अस्वच्छ पद्धति, कर्मचारियों के चिकित्सा परीक्षण और प्रशिक्षण में त्रुटियाँ, अस्वच्छ संरचना और कच्चे व तैयार भोजन में क्रॉस‑कंटैमिनेशन का खतरा जैसी गंभीर बातें फ़ाइल में उल्लेखित हैं। इसमें कच्चे चिकन को खुली बर्तन में रखना, कटी हुई सब्जियों का सही ढंग से भंडारण न करना, पीने योग्य पानी के परीक्षण के रिकॉर्ड न होना, अस्वच्छ फ़र्श और दोषपूर्ण ड्रेनेज, दीवार पर उखड़े हुए प्लास्टर, अस्वच्छ बर्तन और भोजन के अवशेष जैसी त्रुटियाँ भी प्रशासन ने स्पष्ट की हैं।
प्रतिबंधित पदार्थों पर और भी कड़ी कार्रवाई पानमसाला, गुटखा, सुगंधित तंबाकू और इसी तरह के प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, बिक्री, वितरण और परिवहन पर १३ जुलाई २०२६ को बंदी लगाने के साथ की गई, जैसा कि फ़ाइल में उल्लेख है। जून से अगस्त के बीच इन मामलों में ६४४ FIR, ८६७ गिरफ्तारियाँ और ११० वाहन जप्त किए गए। इसके अलावा प्रतिबंधित पदार्थों का ₹१९.६२ कोटी का स्टॉक भी जप्त किया गया। विशेष रूप से दूध और दुग्धजन्य पदार्थों में ₹५.४० कोटी, जबकि अन्य खाद्य पदार्थों में ₹४२.१७ कोटी का स्टॉक जप्त हुआ, और प्रतिबंधित पदार्थों सहित कुल जप्त स्टॉक का मूल्य लगभग ₹६७.२० कोटी है, यह प्रशासन के आँकड़ों से स्पष्ट होता है।
हालांकि पुणे विभाग अग्रणी है और कोकण, संभाजीनगर भी गंभीर हैं। विभागीय आँकड़ों के अनुसार पुणे विभाग में सबसे अधिक ४,२६१ निरीक्षणे हुईं। यहाँ १,३२१ सुधारणा नोटिसा, १६८ लाइसेंस निलंबित और ₹११.४४ कोटी का स्टॉक जप्त किया गया। इसी तरह कोकण विभाग में ३,१४२ निरीक्षणे, ९७५ नोटिसा, १०८ लाइसेंस निलंबित और ₹१४.६८ कोटी का स्टॉक जप्त हुआ। छत्रपती संभाजीनगर विभाग में ₹१६.०१ कोटी का स्टॉक जप्त होने की सूचना है।
अब भी क्या यह कार्रवाई का 'धमाका' जारी रहेगा.......?
तीन महीने की यह आँकड़ा प्रशासन द्वारा की गई बड़ी नियामक अभियान की तस्वीर प्रस्तुत करता है। हालांकि, निरीक्षण और कार्रवाई के बाद स्थिति में स्थायी सुधार हुआ या नहीं, यह अगला महत्वपूर्ण प्रश्न है। ५,२६९ सुधारणा नोटिसा और ६०३ लाइसेंस निलंबित होने से कार्रवाई का दायरा दिखता है; लेकिन नियमभंग को फिर से न होने देने के लिए फॉलो‑अप निरीक्षण, अनुपालन और सतत निगरानी कितनी प्रभावी है, इस पर इस अभियान की वास्तविक सफलता निर्भर करेगी। क्योंकि विशेष रूप से होटल‑रेस्तरां क्षेत्र में स्वच्छता, शीत श्रृंखला, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और कच्चे‑पके भोजन को अलग रखने जैसी मूलभूत बातों में त्रुटियाँ पाई जाना केवल एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के कार्यान्वयन के सामने आने वाली चुनौती को उजागर करता है।
अब राजनीतिक दृष्टि से भी यह आँकड़ा महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह प्रश्न सीधे नागरिकों के स्वास्थ्य से संबंधित है और खाद्य सुरक्षा एक संवेदनशील विषय है, सरकार के लिए केवल 'कार्रवाई हुई' पर्याप्त नहीं है; बल्कि यह निष्पक्ष, सतत और सभी स्तरों पर समान है या नहीं, यह प्रश्न महत्वपूर्ण होगा। विशेष रूप से आने वाले समय में प्रशासन द्वारा बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से लेकर छोटे खाद्य विक्रेताओं तक नियमों की समान प्रवर्तन करने पर ही इस अभियान को विश्वसनीयता मिलेगी।
इसका सटीक असर किस पर पड़ेगा......?
१. होटल‑रेस्तरां व्यवसाय पर: १,८०३ निरीक्षणे, ९४८ सुधारणा नोटिसा और १९९ लाइसेंस निलंबित होने से खाद्य व्यवसाय में नियम पालन का दबाव बढ़ेगा।
२. प्रतिबंधित पदार्थों की श्रृंखला पर: ६४४ FIR, ८६७ गिरफ्तारियाँ, ११० वाहन जप्त और ₹१९.६२ कोटी का स्टॉक जप्त होने से उत्पादन‑विक्री‑वितरण‑परिवहन श्रृंखला पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
३. प्रशासन पर: बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बाद अब प्रश्न केवल 'कितनी निरीक्षणे' नहीं रहेगा; नियमभंग को फिर से न होने देने के लिए कितनी प्रभावी फॉलो‑अप होगी, इसका उत्तर प्रशासन को देना होगा।
४. सरकार की छवि के लिए : यदि खाद्य सुरक्षा की कार्रवाई निरंतर, पारदर्शी और भेदभावरहित रही, तो सरकार की नियामक छवि मजबूत हो सकती है....; परंतु यदि कार्रवाई में निरंतरता नहीं रही, तो इतनी बड़ी आँकड़ों पर भी प्रश्नचिन्ह उठ सकता है।
परंतु फाइल में सबसे बड़ा "फटका"....
₹६७.२० कोटी का स्टॉक जब्त, पर नागरिकों का वास्तविक सवाल यह है कि, "जप्ती कितनी हुई".....? के बजाय "असुरक्षित खाद्य बाजार में पहुँचने से रोकने के लिए आगे क्या".....? क्योंकि आज FDA की वास्तविक परीक्षा है कि वास्तविक अर्थ में खाद्य सुरक्षा की लड़ाई में अब आंकड़ों से परे परिणाम दिखाने की परीक्षा है, यह निश्चित है.....!