भिवंडी में मिठाइयों से गायब हुआ चटख रंग, तुकाराम मुंढे की सख्ती का दिखा असर
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गणेशोत्सव से पहले मिठाई दुकानों पर बदला नजारा, कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल पर प्रशासन की नजर
सिटी न्यूज़ मुंबई/गनी खान
गणेशोत्सव से पहले भिवंडी की मिठाई दुकानों का नजारा बदला-बदला नजर आ रहा है। आमतौर पर त्योहारों के दौरान चटख और चमकीले रंगों से सजी दिखने वाली मिठाइयां इस बार अपेक्षाकृत फीकी नजर आ रही हैं। इसकी बड़ी वजह खाद्य एवं औषधि प्रशासन की सख्ती और कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को लेकर बढ़ी निगरानी बताई जा रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त का पदभार संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने खाद्य पदार्थों में नियमों के विपरीत कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विभाग की कार्रवाई के निर्देशों के बाद मिठाई कारोबारियों में भी सतर्कता बढ़ी है। कई दुकानदारों ने कथित तौर पर मिठाइयों में तेज कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल कम या बंद कर दिया है। त्योहारों के दौरान इमरती, जलेबी, पेड़ा, बूंदी, लड्डू, चमचम और रसगुल्ला जैसी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मिठाइयों को चटख रंग देने का चलन भी रहा है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती के बाद दुकानदार अब रंगों के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि रंग कम होने से मिठाइयां भले ही पहले की तरह चमकीली नजर न आएं, लेकिन इससे गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। उनका दावा है कि ग्राहक भी अब सिर्फ दिखावे के बजाय स्वाद और गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि बहुत ज्यादा गहरे या असामान्य रूप से चमकीले रंग वाली मिठाइयां खरीदते समय सावधानी बरतें। त्योहार के मौसम में मिठाई की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई है।
भिवंडी में गणेशोत्सव से पहले मिठाइयों के रंग में आया यह बदलाव फिलहाल प्रशासन की सख्ती और खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ी जागरूकता का असर माना जा रहा है।