विद्युत कंपनियां केवल सरकारी हैं......; केवल महावितरण की ऋणमुक्ति के लिए “IPO” का शॉर्टकट.......!
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निजीकरण को स्पष्ट रूप से खारिज किया.......; महावितरण के पुनर्गठन को गति......
कर्मचारियों के प्रश्नों पर सकारात्मक समाधान...; ठेकेदार कर्मचारियों के लिए “हरियाणा पैटर्न” का अध्ययन.....
मुंबई, दि.९(अनंत नलावडे)- राज्य की महापारेषण, महावितरण और महाजनको इन तीन सरकारी बिजली कंपनियों के निजीकरण का प्रश्न ही नहीं, ऐसी स्पष्ट और ठोस भूमिका मुख्यमंत्री तथा ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को प्रस्तुत की। लेकिन, सरकारी कंपनियों को आर्थिक रूप से सक्षम करके निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अब पुनर्गठन, कार्यक्षमता वृद्धि और पूँजी बाजार से धन उभारने पर भी सरकार ने बल दिया है। इसलिए एक ओर निजीकरण का विरोध करने की राजनीतिक गारंटी देते हुए, दूसरी ओर महावितरण के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए “IPO” का मार्ग खोलने की सरकार की रणनीति स्पष्ट हो रही है।
महावितरण पर वर्तमान में लगभग ₹८० हजार कोटी का ऋण है और उस पर ब्याज का बड़ा बोझ कंपनी की आर्थिक क्षमता पर पड़ रहा है। यह ऋण पुनर्गठित करके कंपनी को ऋणमुक्त करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। साथ ही महावितरण के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई है और “IPO” की तैयारी को भी गति दी जा रही है। इसके लिए कंपनी की बैलेंस शीट को सुदृढ़ करके लगभग ₹३३ हजार कोटी के दायित्वों के प्रबंधन के लिए धन उगाहने का प्रयास इस माध्यम से किया जाएगा।
“IPO” से पारदर्शिता का नया चरण शुरू होगा.......?
यदि महावितरण का “IPO” बाजार में आता है, तो यह सरकारी बिजली वितरण कंपनी से आने वाला देश का पहला “IPO” बनने की संभावना है। “IPO” के माध्यम से पूँजी उभारते हुए कंपनी में आर्थिक अनुशासन, पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने का सरकार का दावा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में सरकारी स्वामित्व और नियंत्रण कैसे बना रहेगा, साथ ही कर्मचारियों और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा।
फ्रेंचाइज़ी को सीमित दार...
मुख्यमंत्री फडणवीस ने फ्रेंचाइज़ीकरण को निजीकरण नहीं बताया और भिवंडी, मुंब्रा और मालेगाव जैसे क्षेत्रों के अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मालेगाव में वितरण का घाटा ५० प्रतिशत से अधिक से घटकर ३६ प्रतिशत हो गया है। इसलिए लंबे समय से घाटे वाले विशिष्ट क्षेत्रों के लिए सीमित रूप में फ्रेंचाइज़ी मॉडल पर भी विचार किया जाएगा।
कर्मचारियों को भी राहत...
बिजली कर्मचारी, अभियंता और अधिकारियों के लंबित प्रश्नों पर कानूनी और प्रशासनिक ढाँचे में सकारात्मक समाधान निकालने का आश्वासन सरकार ने दिया। विशेष रूप से अनुकम्पा सिद्धांत पर नियुक्तियों के प्रश्नों को शीघ्र निपटाने के साथ-साथ ठेकेदार कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए “हरियाणा पैटर्न” का अध्ययन करने हेतु समिति स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आगे के पाँच वर्षों में २० हजार मेगावॉट की जरूरत...
राज्य में बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए अगले पाँच वर्षों में अतिरिक्त २० हजार मेगावॉट की क्षमता की आवश्यकता होगी, यह भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा। साथ ही उत्पादन और मांग के अंतर को भरते हुए सरकारी बिजली कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना सरकार के सामने अगला बड़ा चुनौती है।
राजनीतिक अर्थ...
निजीकरण नहीं, लेकिन प्रतिस्पर्धा की तैयारी... सरकार की इस भूमिका का मुख्य राजनीतिक संदेश यही है। क्योंकि सभी कर्मचारी संघों के निजीकरण विरोधी दबाव को कम करते हुए महावितरण के आर्थिक संकट पर “IPO”, पुनर्गठन और सीमित फ्रेंचाइज़ी जैसे विकल्पों का उपयोग करने का प्रयास दिख रहा है। इसलिए आगे के समय में “सरकारी स्वामित्व बनाए रखते हुए निजी क्षेत्र की कार्यक्षमता के साथ प्रतिस्पर्धा” बिजली क्षेत्र में सरकार का नया प्रयोग बन जाएगा। यदि इसमें सफलता मिलती है तो महावितरण आर्थिक रूप से सक्षम हो सकता है; लेकिन “IPO” के बाद स्वामित्व, नियंत्रण, कर्मचारी हित और ग्राहक प्रभावों के संबंध में पारदर्शिता बनाए रखना राज्य सरकार के लिए आगामी समय में निर्णायक रहेगा।