केन्द्र सरकार की नई आर्थिक नीति: 2024-2025 में विकास की दिशा
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
केन्द्र सरकार ने 2024-2025 के लिए नई आर्थिक नीति जारी की, जिसमें कर सुधार, बुनियादी ढाँचा निवेश और डिजिटल पहल शामिल हैं, लक्ष्य 7.2% जीडीपी वृद्धि।
नई आर्थिक नीति का शुभारंभ करते हुए भारत की केन्द्र सरकार ने 2024-2025 वित्तीय वर्ष के लिए व्यापक सुधार पैकेज की घोषणा की। इस योजना में कर संरचना में संशोधन, बुनियादी ढाँचे में निवेश, और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। नीति निर्माताओं का कहना है कि इन कदमों से वार्षिक औसत जीडीपी वृद्धि दर को 7.2 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, सार्वजनिक वित्तीय स्थिरता को सुदृढ़ करने के लिए राजकोषीय घाटे को 5.5 प्रतिशत जीडीपी तक सीमित किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार की विकास‑उन्मुख दृष्टिकोण को दर्शाती है और राष्ट्रीय विकास को सुदृढ़ करती है।
इस नीति के प्रमुख तत्वों में आयकर स्लैब का पुनःसमीकरण शामिल है, जिसमें 30‑लाख रुपये से ऊपर की आय पर 28 प्रतिशत कर दर लागू की गई है, जबकि मध्यम वर्ग के लिए 10‑लाख तक की आय पर 12 प्रतिशत कर दर बनी रहती है। साथ ही, वस्तु एवं सेवा कर (GST) में 5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी गई है, जिससे छोटे व्यवसायों को लाभ मिलेगा। बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में सड़क, रेल और पोर्ट विकास के लिए कुल 3.2 ट्रिलियन रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो पिछले वर्ष के बजट से 12 प्रतिशत अधिक है। डिजिटल भारत पहल को तेज करने हेतु 450 अरब रुपये का निवेश किया गया है, जिसमें ग्रामीण broadband विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है।
वित्तीय वर्ष 2024‑2025 के लिए राजकोषीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिसमें कुल राजस्व संग्रह 28.5 ट्रिलियन रुपये और गैर‑कर राजस्व 4.1 ट्रिलियन रुपये होने की योजना है। सरकार ने सार्वजनिक खर्च को 6.8 ट्रिलियन रुपये तक सीमित किया है, जिससे राजकोषीय घाटा 5.5 प्रतिशत जीडीपी के भीतर रहेगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कर प्रशासन को सुदृढ़ करने हेतु 12‑महीने की डिजिटल कर निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही, राज्य सरकारों को अतिरिक्त 1.3 ट्रिलियन रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे केंद्र‑राज्य सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
नीति के कार्यान्वयन के लिए विशेष रूप से गठित केंद्रीय आर्थिक नीति आयोग ने पाँच चरणीय कार्ययोजना तैयार की है। प्रथम चरण में विधायी परिवर्तन को संसद में पारित किया जाएगा, जबकि द्वितीय चरण में सभी संबंधित मंत्रालयों को कार्य निर्देश जारी किए जाएंगे। तृतीय चरण में स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियों द्वारा त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी, जिससे योजना की प्रगति का पारदर्शी मूल्यांकन संभव होगा। चौथे चरण में सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) मॉडल को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा। अंत में, पंचम चरण में सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित उपाय समय पर लागू होते हैं, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर अगले दो वर्षों में 7.2 प्रतिशत से 8.0 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जिससे रोजगार सृजन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही, कर संरचना में पारदर्शिता और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में निवेश से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में 15 प्रतिशत की संभावित वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। सरकार ने इस नीति को राष्ट्रीय विकास एजेंडा के साथ संरेखित करने के लिए सतत निगरानी तंत्र स्थापित किया है, जिससे नीतिगत लचीलापन सुनिश्चित हो सके। कुल मिलाकर, नई आर्थिक नीति केंद्र सरकार की विकास‑उन्मुख दिशा को सुदृढ़ करती है और देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगी।