विद्यार्थियों की थाली में घटिया भोजन....; अमित ठाकर ने नौकरी पूछी..... और मोदी की तसबीर पर भाजपा का आंदोलन....!
City News Mumbai••1 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
"कल आया हुआ लड़का कुछ कहता है और हम आंदोलन करते हैं"...; रविंद्र चव्हाण का युवा मोर्चा भर बैठकों में खड़े होकर बोलता है...!
पुणे के वासती गृह के मुद्दे से शुरू हुए विवाद ने भाजपा के घर में ही हलचल मचा दी......
मुंबई, दिनांक 2 (अनंत नलावड़े) - पुणे के उस सरकारी तकनीकी संस्थान के वासती गृह में छात्रों को दिए जा रहे घटिया भोजन का प्रश्न सीधे राजनीतिक विवाद के केंद्र में आया और उसके बाद हुई घटनाओं से भाजपा के युवा मोर्चे को स्वयं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने बुधवार को घोषित घर का आहेर दिया। उन छात्रों ने अपने भोजन के प्रश्न के लिए मनसे के युवा नेता अमित ठाकरे के पास दौड़ने के बाद ठाकरे ने वासती गृह जाकर अधिकारियों से जवाब माँगा। उसी समय अधीक्षक की कुर्सी के पीछे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर, छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीरों के साथ लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को मनसे कार्यकर्ताओं ने नीचे उतारा जिससे राजनीतिक विवाद अचानक उभरा।
परंतु इस घटना के विरोध में भाजपा युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के निवासस्थान के बाहर आक्रामक प्रदर्शन किया। हालांकि, इस प्रदर्शन की विधि ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की नाराज़गी का कारण बनी। इसलिए बुधवार को मुंबई भाजपा की कार्यकारिणी बैठक में युवा मोर्चे के पदाधिकारियों को मार्गदर्शन करते हुए चव्हाण ने इस प्रकार पर तीव्र नापसंदगी व्यक्त की और युवा मोर्चे के पदाधिकारियों के कान भी चुभे। उसी समय ठीक से बोलने के नाद में प्रदेशाध्यक्ष चव्हाण का संतुलन बिगड़ गया और उनके बयान ने एक नए विवाद को जन्म दिया।
"कल आया बच्चा कुछ कहता है और हम आंदोलन करते हैं"...!
विरोधियों या किसी व्यक्ति के बयान पर तुरंत सड़क पर उतरकर जवाब देना उचित नहीं है, यह चव्हाण ने शुरू में स्पष्ट किया। फिर उन्होंने बात के क्रम में “कल आया बच्चा कुछ कहता है और हम आंदोलन करते हैं...” शब्दों में युवा मोर्चे की अत्यधिक उत्साही भूमिका पर प्रश्न चिह्न लगाया। अब चव्हाण के इस बयान का सीधा संदर्भ अमित ठाकरे के मुद्दे पर किए गए आंदोलन से है, यह बैठक में चर्चा से स्पष्ट हुआ। उसी समय पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने भी प्रत्येक राजनीतिक बयान का उत्तर आंदोलन से देने के बजाय अध्ययन, विचारधारा, संगठन और जनता के प्रश्नों पर काम करने की अपेक्षा व्यक्त की।
छात्रों का प्रश्न बिल्कुल कहाँ खो गया.....?
इस पूरे विवाद की शुरुआत केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि छात्रों के थाल में भोजन के प्रश्न से हुई थी। पुणे के प्रसिद्ध सरकारी तकनीकी संस्थान के आवासीय वासती गृह में रहने वाले छात्र-छात्राओं को रोज दोपहर और रात को घटिया भोजन मिलने की शिकायत लेकर छात्रों ने अमित ठाकरे के पास दौड़ लगाई थी। उसके बाद ठाकरे ने स्वयं वासती गृह जाकर संबंधित अधिकारियों को बुलाकर भोजन की गुणवत्ता के बारे में जवाब माँगा। उसी मुलाकात में अधीक्षक की कुर्सी के…