अमित शाह को नई राष्ट्रीय ऊर्जा नीति के सलाहकार नियुक्ति: ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव
City News Mumbai••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
अमित शाह को 15 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (NEP) के कार्यान्वयन हेतु विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया। उनकी पृष्ठभूमि, नीति के मुख्य बिंदु और उद्योग की प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण इस लेख में पढ़ें।
अमित शाह, जो पिछले दो दशकों से भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, को सरकार ने 15 अगस्त 2024 को नई राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (NEP) के कार्यान्वयन के लिए विशेष सलाहकार नियुक्त किया है। इस नियुक्ति से नीति निर्माण में तकनीकी विशेषज्ञता और प्रायोगिक अनुभव को मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है। अमित शाह ने अपने करियर के दौरान कई बड़े ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी की है, जिसमें 2020 में स्थापित 5,000 मेगावॉट क्षमता वाला सौर ऊर्जा पार्क भी शामिल है। नई भूमिका में वे नीति की रूपरेखा, कार्यान्वयन रणनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दिशा देने के लिए जिम्मेदार होंगे।
अमित शाह ने 2003 से भारतीय ऊर्जा मंत्रालय में विभिन्न पदों पर कार्य किया, जिसमें 2015 से 2020 तक नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के निदेशक का कार्यकाल शामिल है। इस अवधि में उन्होंने 30 प्रतिशत तक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, और कई सार्वजनिक-निजी साझेदारियों को सफलतापूर्वक लागू किया। उनका तकनीकी ज्ञान और प्रोजेक्ट प्रबंधन कौशल उन्हें इस नई सलाहकार भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है।
राष्ट्रीय ऊर्जा नीति 2024, जिसे इस वर्ष के अंत में संसद में पेश किया जाना है, पाँच मुख्य स्तंभों पर आधारित है: नवीकरणीय ऊर्जा का 60 प्रतिशत लक्ष्य, ऊर्जा दक्षता में 25 प्रतिशत सुधार, इलेक्ट्रिक वाहन बुनियादी ढांचा विस्तार, ऊर्जा भंडारण तकनीक का विकास, और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग को सुदृढ़ करना। नीति के अनुसार 2030 तक कुल स्थापित क्षमता 1,200 गिगावॉट तक पहुंचाने की योजना है, जिसमें सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा का प्रमुख योगदान होगा।
उद्योग विशेषज्ञों ने अमित शाह की नियुक्ति को सकारात्मक रूप से देखा है। भारतीय ऊर्जा सलाहकार संस्थान (IEAI) के प्रमुख ने कहा कि "शाह की व्यावहारिक अनुभव नीति के कार्यान्वयन में गति लाएगा और संभावित बाधाओं को कम करेगा"। वहीं, प्रमुख ऊर्जा कंपनियों के सीईओ ने कहा कि नई नीति के स्पष्ट लक्ष्यों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और विदेशी पूंजी का प्रवाह तेज होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कदम को सराहा गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बताया कि भारत की ऊर्जा नीति में नवीकरणीय ऊर्जा का बड़ा हिस्सा और ऊर्जा सुरक्षा पर बल, वैश्विक जलवायु लक्ष्य के साथ संरेखित है। शाह की भूमिका में अंतरराष्ट्रीय तकनीकी साझेदारियों को सुदृढ़ करना और विदेशी निवेशकों के साथ सहयोगी समझौते करना शामिल होगा।
आगे देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि अमित शाह की सलाहकार भूमिका नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी होगी। यदि नीति के प्रमुख बिंदुओं को समय पर लागू किया गया, तो भारत 2035 तक विश्व की शीर्ष पाँच ऊर्जा निर्यातकों में शामिल हो सकता है। इस प्रकार, शाह की नई नियुक्ति न केवल राष्ट्रीय ऊर्जा परिदृश्य को बदलने की संभावना रखती है, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रेरक बन सकती है।