भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन के लिए एशियाटिक सोसायटी को पहल करनी चाहिए
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई को ज्ञान का डिजिटलीकरण करके देशभर के पुस्तकालयों और शोध संस्थानों से जोड़ना चाहिए
मुंबई: भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई को पहल करनी चाहिए। संस्था के ज्ञान संग्रह का डिजिटलीकरण करके उसे देशभर के छात्रों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए उपलब्ध कराने का आह्वान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया।
टाउन हॉल में एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई की नव-निर्वाचित समिति के परिचय कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। इस बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर, विधायक अमित साटम, प्रवीण दरेकर, एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, सचिव विवेक गणपुले आदि उपस्थित थे। इस बार प्रसिद्ध उद्यमी रमेश दंडवते ने एशियाटिक के सुदृढ़ीकरण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता की, जिसके लिए मान्यवरों द्वारा उनका सम्मान किया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्र की स्मृति, इतिहास, संस्कार, भाषा, अभिलेख और परंपराओं का संरक्षण महत्वपूर्ण है। इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा करने वाले राष्ट्र की पहचान कभी नष्ट नहीं होती। भारतीय ज्ञान परंपरा कई चुनौतियों के बावजूद बनी हुई है। ज्ञान किसी भी ढांचे में बंद नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वतंत्र होना चाहिए। इस ज्ञान का उपयोग देश और संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए होना चाहिए।
भारतीय इतिहास, पुरातत्व, भाषा, दर्शन, साहित्य और विज्ञान का पुनर्मूल्यांकन भारतीय दृष्टिकोण से किया जाना आवश्यक है। सोसायटी को महाराष्ट्र के छात्रों और शोधकर्ताओं को संग्रह के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ज्ञान संग्रह का डिजिटलीकरण करना चाहिए और देश के पुस्तकालयों व शोध संस्थानों को साझा मंच पर जोड़ना चाहिए। साथ ही 'ज्ञान भारत राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन' में सक्रिय भागीदारी लेकर गांवों और विद्वानों के घरों में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों के खोज, संकलन, संवर्धन और शोध के लिए विशेष अभियान चलाने का आह्वान भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया।
एशियाटिक सोसायटी का कार्य अधिक व्यापक होना चाहिए
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एशियाटिक सोसायटी के कार्य को अधिक व्यापक रूप देने के लिए राज्य सरकार का पूर्ण सहयोग रहेगा, ऐसा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल अतीत को समझने का साधन नहीं है, बल्कि वर्तमान को दिशा देने वाला और भविष्य की गति तय करने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु है। मानवता की यात्रा, विचारों का निर्माण, अध्ययन पद्धति और विभिन्न विज्ञानों का विकास दस्तावेजीकरण करना अत्यावश्यक है। विदेशी आक्रमणों में नालंदा विश्वविद्यालय के बड़े पैमाने पर नष्ट हुए ग्रंथसंग्रह की घटनाओं से ज्ञानसंग्रह के संरक्षण का महत्व उजागर होता है। फिर भी कई विद्वानों ने उपलब्ध ग्रंथों का संरक्षण करके इस समृद्ध ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया। इस परंपरा का संरक्षण और संवर्धन आज की बड़ी जिम्मेदारी है, यह मुख्यमंत्री फडणवीस ने उल्लेख किया।
नई कार्यकारी समिति के प्रयासों से संस्था को नई ऊर्जा मिली है और एशियाटिक सोसायटी नई उत्साह के साथ कार्य करेगी, इस विश्वास को मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया। *राज्य केंद्रीय पुस्तकालय की नई जगह तैयार हो गई है। इसे इस नई जगह पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, पुस्तकालय संचालनालय और सहायक मुद्रांक नियंत्रक के कार्यालयों को भी यहाँ से अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए जल्द ही सरकार से आवश्यक सहयोग प्राप्त होगा।* सोसायटी के मुख्य कार्य को अधिक बल मिले, तथा यहाँ आने वाले विद्वानों को आवश्यक ग्रंथ, संदर्भ साहित्य और ज्ञानसंग्रह आसानी से उपलब्ध हो, इसके लिए सरकार सकारात्मक भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय, संबंधित अधिकारी और लोकप्रतिनिधियों से आवश्यक सहायता की जाएगी, ऐसा आश्वासन उन्होंने दिया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने एशियाटिक सोसायटी की नई कार्यकारी समिति को आगे की यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए संस्था के भविष्य के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।
एशियाटिक सोसायटी की विरासत के संरक्षण के लिए सरकार का सर्वाधिक सहयोग
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि एशियाटिक सोसायटी का 222 वर्ष का गौरवशाली विरासत है। प्राचीन ग्रंथ, पांडुलिपि और सिक्कों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है, और इस विरासत के संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार संस्था को सर्वाधिक सहयोग प्रदान करेगी, ऐसा उन्होंने आश्वासन दिया। गणेशोत्सव की पूर्व संध्या को आयोजित कार्यक्रम के लिए उन्होंने आयोजकों को बधाई भी दी।
'गणेश ज्ञानारती' प्रदर्शन का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उद्घाटन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई में ‘गणेश ज्ञानारती’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई में ‘गणेश ज्ञानारती’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य मान्यवर उपस्थित थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनी का निरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की जानकारी ली। प्रदर्शनी में मौर्य, सातवाहन, गुप्त और छत्रपति शिवाजी महाराज के समय की लगभग 1300 दुर्लभ सुवर्ण, रजत, कांस्य और तांबे की ऐतिहासिक सिक्के प्रदर्शित किए गए हैं। भगवान गौतम बुद्ध के भिक्षापात्र का अंश, बुद्ध प्रतिमा और बोधिसत्त्व के अवशेष भी प्रस्तुत किए गए हैं। मुगलकालीन भारत का 1788 का नक्शा और नर्मदा नदी का 1870 का नक्शा भी प्रदर्शनी का आकर्षण हैं। भारतीय राजाओं और जमीनदारों के शाही दरबार के अल्बम सहित कई दुर्लभ ऐतिहासिक ग्रंथ यहाँ रखे गए थे। कोल्हापुर और कान्हेरी के पुरातात्विक उत्खनन की वस्तुएँ तथा बुद्ध प्रतिमा के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातात्विक धरोहर का समृद्ध दर्शन कराती यह प्रदर्शनी थी।
एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई के अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने प्रास्ताविक किया। आभार सचिव विनय गणपुले ने व्यक्त किया।